मुंबई। आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बेंगलुरु जैसे शहरों में हॉकर पॉलिसी लागू की गई, लेकिन मुंबई में आठ साल बाद भी यह कागजों पर ही है. प्रशासन इसे लागू करने को तैयार नहीं है, क्योंकि राजनीतिक नेताओं, मनपा के अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों और फेरीवालों के नेताओं का एक बड़ा रैकेट है। हॉकर नीति लागू होने से महानगरपालिका को करोड़ों का राजस्व मिलेगा और सड़कें साफ होंगी। यह हॉकर विरोधी संचालन के लिए आवश्यक जनशक्ति और मशीनरी को भी बचाएगी। आखिर हॉकर पॉलिसी लागू न करने के पीछे की मंशा क्या हैं? इसकी जांच करने की मांग अनिल गलगली ने की हैं.

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