कृष्ण कुमार मिश्र,वापी। रात करीब दस बजे वन्यजीव बचाव दल के वर्धमान शाह को दमनगंगा नदी के किनारे रामदेव ढाबा होटल के पास एक बहुत बड़ा अजगर दिखाई दिया । जिसे देखने के लिए लोगों की भीड़ जमा हो गई थी। सांप हाईवे के काफी करीब होने के कारण सड़क पर चढ़ते समय दुर्घटना की आशंका बनी हुई थी। सर्प मित्र वर्धमान शाह , सुनील पटेल और अन्य साथी मिल कर करीब 10 फीट लंबे एक अजगर को काफी मशक्कत के बाद पकड़ा और उसे जंगल विस्तार में छुड़वाया गया। लोगों में सवाल था ,इतना बड़ा अजगर आखिर आया कहां से ? जबकि स्थानीय लोगों ने इसे विकास के नाम पर जंगलों को नष्ट करने का कारण माना है।

गौरतलब है कि विकास के नाम पर सरकार जमीन कौड़ियों के भाव दे देती है । ताज़ा उदाहरण दमनगंगा नदी के किनारे की सैंकड़ों एकड़ वन भूमि वापी की एक निर्माण कंपनी को कौडियों के दाम पर औद्योगिक क्षेत्र बनाने के लिए दी गई है। कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा सरकार को जमीन के लिए दी गई कीमत से कई गुना ज्यादा उस जमीन पर के 5000 से ज्यादा के पेड़ों की कटाई कर वसूल कर लिया गया, हाल फिलहाल उस जमीन को समतल करने का काम चल रहा है। जिसके कारण वन्य जीवों को अपने घरों से बेघर होना पड़ा और यह वन्य जीव अपना नया ठिकाना ढूंढते ढूंढते बस्ती की तरफ आ जाते है, और ऐसी परिस्थिति में जंगली जीव व मनुष्य आमने-सामने हो जाते हैं।

विकास के नाम पर जंगलों को काटकर औद्योगीकरण होने से दमनगंगा नदी किनारे आने वाले उद्योगों से भविष्य में नदी के किनारे सीधे अपना प्रदूषित जल नदी में प्रवाहित करेंगे जिससे वापी और आसपास के क्षेत्रों में पीने के लिए वितरित किया जाने वाला पानी प्रदूषित हो जाएगा और मानव शरीर पर इसका प्रभाव कितना होगा वो तो केवल समय ही बताएगा। आखिर सवाल उठता है कि पर्यावरण की बातें करने वाले, हर वर्ष पर्यावरण बचाओ की गतिविधि वृक्षारोपण में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेने वाले, वन विभाग व अन्य संबंधित विभाग चुप क्यों हैं यह एक विचारणीय प्रश्न है?

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