महाराष्ट्र में कुर्मी राजनीति

बिहार और उत्तर प्रदेश में सत्ता पर ब्राह्मण और सवर्ण वर्चस्व को तोड़ने के लिए सत्तर के दशक में समाजवादी नेता राममनोहर लोहिया ने एक नारा दिया था ‘समाजवादी सोशलिस्ट पार्टी ने बांधी गांठ पिछड़ा पावे सौ में साठ।‘ 2014 में इसी नारे की को केंद्र में रख खुद को पिछड़ा घोषित कर नरेंद्र मोदी ने राजनीतिक प्रयोग किया और देश की सत्ता के शिखर पर पहुंचे। अब महाराष्ट्र में कुर्मी समाज को लेकर यही प्रयोग किये जाने की भूमिका बन रही है। महाराष्ट्र की राजनीति मराठा समाज के इर्द गिर्द घूमती है। राज्य की 40 फीसदी आबादी अन्य पिछड़ा वर्ग की है जिसमे कुर्मी समाज भी शामिल है। महाराष्ट्र में झाडे, खेडुळे, बावणे, धानोजे, खैरे, दखणे, वांडेकर, जाधव, लोणारी, हिंदरे, घटोळे, तिरळे, किल्लेदार, माना, किल्लेदार, तिल्लोरी, मोरे , कुणबी, लेवापाटील, पाटील, देशमुख, सिंधिया उपनाम कुर्मी समाज से ताल्लुक रखते है। बीते मंगलवार को शिर्डी में कुर्मी क्षत्रिय महासभा के 44वें स्थापना दिवस के बहाने महाराष्ट्र में कुर्मियों को एक जुट करने की कोशिश शुरू हुई है। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अपना दल एस की अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री व सांसद अनुप्रिया पटेल शामिल हुईं। अनुप्रिया पटेल के साथ पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं शिवसेना सांसद अरविन्द सावंत, शिर्डी से भाजपा के विधान परिषद् सदस्य सचिन तांबे, आगरा के भाजपा एसपी बघेल, उप्र के जेल राज्य मंत्री जय कुमार जैकी, राज्य मंत्री श्रीमती रेखा(वर्मा)पटेल, मप्र सरकर के मंत्री कमलेश्वर पटेल, पूर्व सांसद बिग्रेडियर सुधीर सावंत, अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रिय सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एलपी पटेल, डॉ. एस आर वर्मा एवं अपना दल के महाराष्ट्र प्रभारी महेन्द्र वर्मा की मौजूदगी में महाराष्ट्र के कुर्मी क्षत्रिय समाज को एक मंच पर लाने का संकल्प लिया गया। अभी यह समाज कभी मराठा तो कभी अन्य वर्ग की राजनीति से जुड़ा रहा है लेकिन प्रतिनिधित्व के नाम पर उसके बहुत कम लोग सदन में पहुँच पाते हैं।

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Shyamji Mishra Editor

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