मुंबई। साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक राष्ट्रीय संस्था नव कुम्भ साहित्य सेवा संस्थान के पटल से आनलाइन वर्चुअल ब्रॉडकास्ट के माध्यम से व्याख्यान हेतु साहित्य,संस्कृति, भारतीय विद्या,श्रमिक,अध्यात्म,व्याकरण इत्यादि विषयों पर 23 पुस्तकों की रचना करने वाले,अखिल भारतीय साहित्य परिषद के राष्ट्रीय मंत्री,भारतीय मजदूर संघ,महाराष्ट्र के मंत्री रहे केंद्रीय हिंदी निदेशालय,मानव संसाधन मंत्रालय,भारत सरकार में सलाहकार,‌सीसी आरटी,संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार सीनियर फेलो,भारत विकास परिषद,अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्य डॉक्टर दिनेश प्रताप सिंह उपस्थित थे।डा. दिनेश प्रताप सिंह प्रतापगढ़ ,उत्तर प्रदेश के मूल निवासी है।एम.ए (भूगोल),पीएच. डी.,डी.आर. टी.एम. इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त, मुंशी प्रेमचंद पुरस्कार,प्रताप नारायण मिश्र पुरस्कार,बाल साहित्य पुरस्कार-हिंदी सभा,राष्ट्रधर्म कहानी लेखन पुरस्कार,साहित्य भूषण सम्मान, महाराष्ट्र राज्य साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित विद्वान के द्वारा हिंदी साहित्य के इतिहास पर विधिवत प्रकाश डाला गया। संस्था के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी विनय शर्मा दीप ने बताया कि डॉ सिंह ने आज की हालत पर चर्चा करते हुए सभी साहित्यकारों से निवेदन भी किया कि शुद्ध वर्तनी का प्रयोग करते हुए हिंदी लिपि को अपनाएं और विद्वान साहित्यकारों को पढ़ें, साथ साथ देश की अन्य भाषाओं,बोलियों का सम्मान करते हुए हिंदी का प्रचार प्रसार करें।

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