दिल्ली के निगमबोध घाट में आज (गुरूवार) को मशहूर कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव का अंतिम संस्कार किया गया। राजू के भाई ने मुखाग्नि दी और उनके परिवारजनों ने नम आंखों से विदा किया। एक तरह से राजू का परिवार टूट चुका है, उनके लिए यह पल चुनौती वाला है। परंतु दुख की इस घड़ी में राजू की पत्नी, बच्चे और बाकी परिवार मजबूती से खड़ा है।
मशहूर कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव का 21 सितंबर को दिल्ली के एम्स अस्पताल में निधन हो गया था। वे पिछले 42 दिनों तक अस्पताल में जिंदगी से जंग लड़ने के बाद आखिरी सांस ली। उन्हें 10 अगस्त को जिम में वर्कआउट करते हुए कार्डियक अरेस्ट आया था। कई दिनों तक उनका इलाज चला, पर सबके चहेते गजोधर भैया अब हमारे बीच नहीं रहे, जबकि इस पर यकीन करना बेहद मुश्किल है। श्रीवास्तव के निधन से फैंस समेत फिल्म, टीवी, राजनीतिक जगत के लोग गमगीन हैं। सभी नम आंखों से कॉमेडियन को याद कर रहे हैं। राजू तो चले गए पर अपनी कॉमेडी की अनमोल विरासत दुनिया को सौंप गए।
अपने पीछे करोड़ों छोड़ गए राजू श्रीवास्तव।
कभी अपना जीवन गुजर बसर करने के मुंबई में आटो रिक्शा चलाने वाले राजू श्रीवास्तव परिवार के लिए करोड़ो रुपए की संपत्ति छोड़ गए हैं। जनसत्ता ने एक वेब साइट के हवाले से अपनी खबर में बताया है कि, राजू श्रीवास्तव एक साधारण जीवन जीते थे। लेकिन अपने पीछे उन्होंने एक इनोवा के साथ-साथ ऑडी क्यू7 (कीमत 82.48 लाख रुपये) और बीएमडब्ल्यू 3 सीरीज (कीमत 46.86 लाख रुपये) छोड़ गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक राजू श्रीवास्तव की अनुमानित नेटवर्थ 15-20 करोड़ के बीच थी।
राजू फिल्मों के अलावा होस्टिंग, विज्ञापन, रियलिटी शो और स्टेज शो में काम करके अच्छी फीस लेते थे। खबर में बताया गया है कि, राजू श्रीवास्तव के पिता जी को बलाई काका के नाम से जाना जाता था क्योंकि वह एक कवि थे। बड़े भाई दीपू श्रीवास्तव हैं और पत्नी का नाम शिखा श्रीवास्तव है। राजू के दो बच्चे हैं, आयुष्मान श्रीवास्तव और बेटी अंतरा श्रीवास्तव।
कानपुर में जन्में राजू श्रीवास्तव बॉलीवुड में काम करने के लिए मुंबई आए थे। बॉलीवुड में अपने अभिनय करियर की शुरुआत राजू ने साल 1988 में रिलीज हुई फिल्म तेजाब से की थी। उसके बाद राजू ने मैंने प्यार किया, बाजीगर, आमनी अथानी खारचा रुपया, बिग ब्रदर, बॉम्बे टू गोवा जैसी कई बॉलीवुड फिल्मों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
राजू श्रीवास्तव का अपना राजनीतिक जीवन भी रहा है। उन्हें यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 2014 के लोकसभा चुनाव में कानपुर लोकसभा सीट से मैदान में उतारा था। हालांकि बाद में 11 मार्च 2014 को उन्होंने टिकट वापस कर दिया और कहा कि उन्हें पार्टी की स्थानीय इकाइयों से पर्याप्त समर्थन नहीं मिला। जिसके बाद वह 19 मार्च 2014 को भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। तभी से वे भाजपा में थे। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी दुख व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी।
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