मुंबई । क्रान्तिकारी विचारधारा के महान योद्धा ,कवि ,गीतकार, शिक्षक, छायावाद, प्रगतिवाद, नई कविता युग के युग प्रवर्तक, लाल किले से काव्य पाठ करने वाले वरिष्ठ साहित्यकार भुवनेंद्र सिंह बिष्ट गुरुजी का गुरुवार दिनांक 15 सितंबर 2022 सुबह 5:00 बजे आकस्मिक निधन हो गया। आ. बिष्ट ९५ वर्ष के थे उनके सबसे छोटे बेटे राजदीप बिष्ट ने मुखागनी दी वहीं बिष्ट अपने बड़े बेटे पूर्व नगरसेवक महादीप बिष्ट मुन्ना और जगदीप के साथ ही रहते थे। ठाणे जिला महाराष्ट्र के राजेंद्र पाल हिंदी हाई स्कूल के प्रधानाध्यापक के साथ-साथ महानगर में चल रहे साहित्यिक मंचों के सलाहकार एवं भारतीय जन भाषा प्रचार समिति के मार्गदर्शक संरक्षक थे। उतराखंड के पौड़ी जनपद के मूल निवासी बिष्ट की जितनी पैठ अपने समाज में थी उससे कई अधिक अन्य समाजों में भी रही। उम्र के इतने बड़े पडाव में भी साहित्य के प्रति उनकी दिनचर्या पहले जैसी रही,वे अंत तक लिखते रहे। महिने के चौथे शनिवार को बिष्ट सभागार में ठाणे और मुंबई के कवियों के लिए कवि सम्मेलन उन्होंने जारी रखा जिसमें वे पिछले दो महिनों से नहीं आ पाए। आज ठाणे और मुंबई के अनेको लोगों ने अपने इन गुरूजी जी को अंतिम विदाई दी। विष्ट जी का साहित्य सफर उत्तराखंड से शुरू होते हुए लखनऊ, इलाहाबाद,दिल्ली में चल रहे छायावाद युग का सफर करते हुए प्रगतिवादी युग को देखते हुए नई कविता युग का भी रसपान किया। उन्होंने सदैव साहित्य के मर्म को और उसके इतिहास को दुहराया तथा वर्तमान में युवा साहित्यकारों का मार्गदर्शन भी किया। भारतीय जन भाषा प्रचार समिति के अध्यक्ष के अनुसार मीडिया प्रभारी विनय शर्मा दीप ने बताया कि आज उनके जाने से मुंबई महानगर से लेकर पूरे भारत की साहित्यिक मंचों से जुड़े हुए साहित्यकारों की आंखें नम हो गई जैसे लग रहा साहित्य की अपार क्षति हो गई है। उनकी अंत्येष्टि महाराष्ट्र के ठाणे जिले में हजारों साहित्यकारों की उपस्थिति में की गई सभी ने उनकी आत्मा की शांति हेतु ईश्वर से प्रार्थना करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि दी।

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