हिंदी राजभाषा सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने हिंदी भाषा को वरीयता देने पर जोर दिया. सम्मेलन में मुख्यमंत्री सहित हिंदी साहित्य के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे.
सूरत. हिंदी भाषा दिवस के अवसर पर समारोह के तहत सूरत शहर के इन्डोर स्टेडियम में हिंदी राजभाषा सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल और राज्य के गृह मंत्री सहित हिंदी साहित्य से जुड़े गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे.  हिंदी भाषा को लेकर वर्तमान की मानसिकता और भविष्य में यह भाषा किस दिशा में विकसित होगी, इस पर चर्चा की गई.
इंडोर स्टेडियम में शहर के प्रांगण में पहली बार हिंदी दिवस समारोह का आयोजन किया गया.  हिंदी भाषा के उत्थान के लिए किए गए सराहनीय कार्य द्वितीय अखिल भारतीय राजभाषा के आयोजन के संबंध में राजभाषा कीर्ति पुरस्कार 2021-22 का भी वितरण किया गया. केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने कहा कि राजभाषा हिन्दी दिवस समारोह आयोजन के लिए सूरत शहर क्यों चुना गया, क्योंकि सूरत शहर वीर नर्मदा की भूमि है. हिंदी दिवस के अवसर पर अमित शाह ने कहा कि इस शहर के पौत्र वीर नर्मद द्वारा पहली बार अंग्रेजों को देश का शासन हिंदी में करने के लिए स्पष्ट शब्दों में कहा था. जब आज़ादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है तो यह सुनिश्चित करना सबसे महत्वपूर्ण है कि हमारा देश अगले 25 वर्षों में किसी भी भाषा के बंधन में न रहे. वर्तमान स्थिति को ध्यान में रखते हुए राजभाषा के तरीके हिंदी को उन्होंने वरीयता देने पर भी सबसे अधिक जोर दिया. उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा के महत्व को बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा आने वाले दिनों में हिंदी भाषा में विभिन्न पाठ्यक्रमों की भी योजना बनाई जा रही है. उन्होंने कहा कि यदि कोई अपनी मातृभाषा में पढ़ना चाहता है, तो वह इसे अच्छी तरह से ग्रहण कर सकता है. रिसर्च में भी यह बात सामने आई है. हिंदी भाषा को और अधिक प्रभुत्व देने के लिए केवल हिंदी भाषा में ही मेडिकल इंजीनियरिंग सहित विषयों को पढ़ाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है.
वर्तमान में जिस तरह से शिक्षा की दिशा में प्रगति हुई है, उसके कारण मात्र अंग्रेजी माध्यम में ही बालकों का उज्जवल भविष्य माता-पिता को दिखाई दे रहा है. जबकि युवा विशेष रूप से अंग्रेजी भाषा पसंद करते हैं और हिंदी भाषा बोलने में हीन महसूस करते हैं. जबकि इस मानसिकता से बाहर आना जरूरी है. बच्चों को हिंदी भाषा में पढ़ने से उन्हें बेहतर सीखने में मदद मिलती है. हिन्दी साहित्य जगत से जुड़े व्यक्तियों को भी हिन्दी भाषा को अधिक से अधिक प्राथमिकता देने का बड़ा मन रखना चाहिए. अन्य स्थानिक भाषा के शब्दों को हिंदी भाषा के शब्दकोश में स्थान देकर समृद्ध करने के लिए खुले मन से स्वागत किया जाना चाहिए. इस समारोह में हिन्दी साहित्य से जुड़े कई गणमान्य व्यक्ति, जिनमें शहर के मंत्री और गणमान्य व्यक्ति शामिल थे.
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