महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी ने आर्य समाज के योगदान को किया याद।

मुंबई। महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी और वैदिक दर्शन प्रतिष्ठान के संयुक्त तत्वावधान में ‘स्वतंत्रता संग्राम और हिंदी के विकास में आर्य समाज के योगदान’ पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अकादमी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. शीतला प्रसाद दुबे ने की।राजकुमार त्रिपाठी ने आमंत्रित अतिथियों का स्वागत किया। इस आयोजन को दो सत्रों में बाँटा गया,प्रथम सत्र के काव्य संध्या में विशिष्ट अतिथि गीतकार विनोद दुबे,विनय शर्मा ‘दीप’,आईडीबीआई बैंक के अधिकारी आशीष त्रिपाठी,रामस्वरूप साहू और कल्पेश आर्य ने अपनी रचनाएँ सुनाईं।विनोद दुबे ने गुरु पर केंद्रित गीत सुनाकर कार्यक्रम को एक ऊँचाई प्रदान की। विनय शर्मा ‘दीप’ के सवैया सहित अन्य प्रस्तुतियों ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का दूसरा सत्र विचारगोष्ठी पर केंद्रित रहा। इस सत्र के विशिष्ट अतिथि आकाशवाणी के वरिष्ठ उद्घोषक आनंद सिंह थे जबकि आर्य प्रतिनिधि सभा के नवनिर्वाचित महामंत्री महेश वेलाणी बतौर सम्माननीय अतिथि के रूप में मौजूद रहे। इस सत्र में श्रीमती भारती श्रीवास्तव,दिलीप वेलाणी,अरुण कुमार आर्यवीर ने अपनी बात रखी। इस अवसर पर पंडित नरेंद्र शास्त्री और स्वामी योगानंद सरस्वती ने भी अपने विचार साझा किया। वैदिक दर्शन प्रतिष्ठान के अध्यक्ष प्रभारंजन पाठक ने महर्षि दयानन्द सरस्वती की प्रासंगिकता पर अपनी बात रखी एवं अपनी संस्कृति को अपनाने पर ज़ोर दिया।आनंद सिंह ने भाषा के नाम पर वैमनस्यता का विरोध करते हुए हिंदी भाषा के प्रति अपनी जिम्मेदारी के निर्वहन पर बल दिया। अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. शीतला प्रसाद दुबे ने कहा “हिंदी दिवस को उत्सव के साथ-साथ प्रतीक के रूप में स्वीकार करना चाहिए।” महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी के सहनिदेशक तथा सदस्य सचिव सचिन निम्बालकर ने अकादमी के गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए उपस्थित अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. जीतेन्द्र पाण्डेय ने किया।आर्य समाज गोरेगांव के प्रधान पवन अबरोल की तरफ से सभी उपस्थित आगंतुकों को स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा रचित ‘सत्यार्थ प्रकाश’ वितरित किया गया। इस अवसर पर लालचंद तिवारी,मुन्ना यादव मयंक,उदय नारायण सिंह निर्झर, पं. रामव्यास, विनीत कोहली, डॉ. मनसा मिश्रा, संगीता दुबे, अजय शुक्ला ‘बनारसी’,राघवेन्द्र, अजित उपाध्याय, प्रभाकर पाण्डेय, धर्मधर आर्य आदि गणमान्य उपस्थित थे।

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