क्या है ESI स्कीम, मुफ्त इलाज से लेकर फैमिली पेंशन तक का कैसे और किसे मिलता है फायदा.

कृष्ण कुमार मिश्र,

कम आय वाले कर्मचारियों पर इलाज के खर्च का बोझ कम रहे और अनहोनी होने की स्थिति में परिवार को मदद हो सके, इसके लिए केन्द्रीय श्रम मंत्रालय कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) योजना चलाता है. कर्मचारी ESI कार्ड या फिर कंपनी से लाए गए दस्तावेज के आधार पर स्कीम का फायदा ले सकता है. ESI स्कीम के संचालन की जिम्मेदारी कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) की है. कर्मचारी राज्य बीमा स्कीम के दायरे में 10 या 10 से ज्यादा कर्मचारियों वाले कंपनी और प्रतिष्ठान आते हैं, हालांकि महाराष्ट्र और चंडीगढ़ में 20 या इससे ज्यादा कर्मचारी वाले प्रतिष्ठान इस योजना के दायरे में आते हैं.

ESI योजना का फायदा निजी कंपनियों, फैक्ट्रियों और कारखानों में काम करने वाले कर्मचारियों को है. स्कीम के लिए कर्मचारी का रजिस्ट्रेशन नियोक्ता की तरफ से होता है. इसके लिए कर्मचारी को परिवार के सदस्यों की जानकारी देनी होती है. नॉमिनी भी कर्मचारी तय करता है. ESI के तहत मिलने वाले मुफ्त इलाज के लाभ के लिए ESI डिस्पेंसरी या हॉस्पिटल जाना होता है. आइए जानते हैं ESI स्कीम के बारे में बाकी की डिटेल्स…

फायदा पाने के लिए सैलरी की मैक्सिमम लिमिट

ESI का लाभ उन कर्मचारियों के लिए है, जिनकी मासिक आय 21 हजार रुपये या इससे कम है. यह वेज लिमिट 1 जनवरी 2017 से प्रभावी है. हालांकि शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों के लिए ESI लाभ प्राप्त करने के लिए न्यूनतम मजदूरी सीमा 25000 रुपये/महीना है. अक्षम कर्मचारी के कवरेज के लिए मैक्सिमम वेज लिमिट नहीं है. ESI स्कीम से जुड़े FAQ के मुताबिक, अगर कर्मचारी का वेतन, कॉन्ट्रीब्यूशन पीरियड शुरू होने के बाद 21000 रुपये प्रतिमाह की मैक्सिमम लिमिट को क्रॉस कर जाता है तो भी वह कॉन्ट्रीब्यूशन पीरियड के खत्म होने तक ESI के दायरे में आने वाला कर्मचारी रहेगा. ऐसे में उसका कॉन्ट्रीब्यूशन डिडक्ट होगा और कुल वेतन पर भुगतान होगा.

ESI स्कीम के संचालन की जिम्मेदारी कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) की है. 0 CLAPS +0 +0 कम आय वाले कर्मचारियों पर इलाज के खर्च का बोझ कम रहे और अनहोनी होने की स्थिति में परिवार को मदद हो सके, इसके लिए केन्द्रीय श्रम मंत्रालय कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) योजना चलाता है. कर्मचारी ESI कार्ड या फिर कंपनी से लाए गए दस्तावेज के आधार पर स्कीम का फायदा ले सकता है. ESI स्कीम के संचालन की जिम्मेदारी कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) की है. कर्मचारी राज्य बीमा स्कीम के दायरे में 10 या 10 से ज्यादा कर्मचारियों वाले कंपनी और प्रतिष्ठान आते हैं, फायदा पाने के लिए सैलरी की मैक्सिमम लिमिट ESI का लाभ उन कर्मचारियों के लिए है, जिनकी मासिक आय 21 हजार रुपये या इससे कम है. यह वेज लिमिट 1 जनवरी 2017 से प्रभावी है. हालांकि शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों के लिए ESI लाभ प्राप्त करने के लिए न्यूनतम मजदूरी सीमा 25000 रुपये/महीना है. अक्षम कर्मचारी के कवरेज के लिए मैक्सिमम वेज लिमिट नहीं है. ESI स्कीम से जुड़े FAQ के मुताबिक, अगर कर्मचारी का वेतन, कॉन्ट्रीब्यूशन पीरियड शुरू होने के बाद 21000 रुपये प्रतिमाह की मैक्सिमम लिमिट को क्रॉस कर जाता है तो भी वह कॉन्ट्रीब्यूशन पीरियड के खत्म होने तक ESI के दायरे में आने वाला कर्मचारी रहेगा.

नियोक्ता के कॉन्ट्रीब्यूशन/अंशदान का पेमेंट केंद्र सरकार 3 वर्षों के लिए करती है. 1 सितंबर 2019 से जिन कर्मचारियों का प्रतिदिन औसत वेतन 176 रुपये है, उन्हें स्कीम में अपना योगदान नहीं देना होता. वर्तमान में ESI स्कीम में कर्मचारी की ओर से सैलरी का 0.75% योगदान जाता है, नियोक्ता की ओर से योगदान की दर, कर्मचारी की सैलरी के 3.25% के बराबर है. ये दरें समय-समय पर बदलती रहती हैं. मौजूदा दरें 1 जुलाई 2019 से प्रभावी हैं. ESI स्कीम में कर्मचारी और अपनी ओर से किए गए योगदान, दोनों को नियोक्ता को महीना खत्म होने के 15 दिनों के अंदर ESIC को जमा करना होता है. कॉरपोरेशन ने SBI और कुछ अन्य बैंकों की शाखाओं को यह भुगतान स्वीकारने की अनुमति दे रखी है. ESI स्कीम के संचालन की जिम्मेदारी कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) की है. 0 CLAPS +0 +0 कम आय वाले कर्मचारियों पर इलाज के खर्च का बोझ कम रहे और अनहोनी होने की स्थिति में परिवार को मदद हो सके, इसके लिए केन्द्रीय श्रम मंत्रालय कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) योजना चलाता है. कर्मचारी ESI कार्ड या फिर कंपनी से लाए गए दस्तावेज के आधार पर स्कीम का फायदा ले सकता है. ESI स्कीम के संचालन की जिम्मेदारी कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) की है. कर्मचारी राज्य बीमा स्कीम के दायरे में 10 या 10 से ज्यादा कर्मचारियों वाले कंपनी और प्रतिष्ठान आते हैं, शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों के लिए ESI लाभ प्राप्त करने के लिए न्यूनतम मजदूरी सीमा 25000 रुपये/महीना है. अक्षम कर्मचारी के कवरेज के लिए मैक्सिमम वेज लिमिट नहीं है. ESI स्कीम से जुड़े FAQ के मुताबिक, अगर कर्मचारी का वेतन, कॉन्ट्रीब्यूशन पीरियड शुरू होने के बाद 21000 रुपये प्रतिमाह की मैक्सिमम लिमिट को क्रॉस कर जाता है तो भी वह कॉन्ट्रीब्यूशन पीरियड के खत्म होने तक ESI के दायरे में आने वाला कर्मचारी रहेगा. ऐसे में उसका कॉन्ट्रीब्यूशन डिडक्ट होगा और कुल वेतन पर भुगतान होगा.

ESI स्कीम में योगदान को लेकर क्या नियम स्कीम में कर्मचारी और नियोक्ता दोनों की ओर से योगदान जाता है. नियोक्ता के कॉन्ट्रीब्यूशन/अंशदान का पेमेंट केंद्र सरकार 3 वर्षों के लिए करती है. 1 सितंबर 2019 से जिन कर्मचारियों का प्रतिदिन औसत वेतन 176 रुपये है, उन्हें स्कीम में अपना योगदान नहीं देना होता. वर्तमान में ESI स्कीम में कर्मचारी की ओर से सैलरी का 0.75% योगदान जाता है, नियोक्ता की ओर से योगदान की दर, कर्मचारी की सैलरी के 3.25% के बराबर है. ये दरें समय-समय पर बदलती रहती हैं. मौजूदा दरें 1 जुलाई 2019 से प्रभावी हैं. ESI स्कीम में कर्मचारी और अपनी ओर से किए गए योगदान, दोनों को नियोक्ता को महीना खत्म होने के 15 दिनों के अंदर ESIC को जमा करना होता है.


. ESI स्कीम में मिलने वाले फायदे चिकित्सा लाभ: ESI में बीमित व्यक्ति और उस पर आश्रित पारिवारिक सदस्यों को बीमा योग्य रोजगार में आने के दिन से चिकित्सा लाभ है. चिकित्सा हितलाभ उपलब्ध कराने का दायित्व राज्य सरकार का है. बीमाकृत व्यक्ति और उसके परिजनों के उपचार पर व्यय की कोई अधिकतम सीमा नहीं है. सेवा निवृत्त और स्थायी अपंग बीमाकृत व्यक्तियों और उसके पति/पत्नी को 120 रुपये के सांकेतिक वार्षिक प्रीमियम पर चिकित्सा देखरेख प्रदान की जाती है.

बीमारी लाभ: बीमित व्यक्ति को बीमारी के दौरान होने वाली छुट्टी के लिए एक साल में अधिकतम 91 दिनों के लिए, मजदूरी के 70 फीसदी की दर से नकद भुगतान किया जाता है. इस हित लाभ का भुगतान बीमारी प्रमाणीकरण से 7 दिन के भीतर हितलाभ मानक दर पर किया जाता है. बीमारी हितलाभ की पात्रता के लिए बीमाकृत कामगार से अपेक्षा की जाती है कि 6 महीनों की अंशदान अवधि में 78 दिनों के लिए अंशदान दें. इसके अलावा 34 घातक और दीर्घकालीन बीमारियों के मामले में मजदूरी के 80% की बढ़ी दर से कर्मचारी को हितलाभ 2 वर्षों तक विस्तारित किया जा सकता है. ESI के तहत मिलने वाले मुफ्त इलाज के लाभ के लिए ESI डिस्पेंसरी या हॉस्पिटल जाना होता है.

आइए जानते हैं ESI स्कीम के बारे में बाकी की डिटेल्स…

ESI स्कीम में मिलने वाले फायदे चिकित्सा लाभ:

ESI में बीमित व्यक्ति और उस पर आश्रित पारिवारिक सदस्यों को बीमा योग्य रोजगार में आने के दिन से चिकित्सा लाभ है. चिकित्सा हितलाभ उपलब्ध कराने का दायित्व राज्य सरकार का है. बीमाकृत व्यक्ति और उसके परिजनों के उपचार पर व्यय की कोई अधिकतम सीमा नहीं है. सेवा निवृत्त और स्थायी अपंग बीमाकृत व्यक्तियों और उसके पति/पत्नी को 120 रुपये के सांकेतिक वार्षिक प्रीमियम पर चिकित्सा देखरेख प्रदान की जाती है.

बीमारी लाभ: बीमित व्यक्ति को बीमारी के दौरान होने वाली छुट्टी के लिए एक साल में अधिकतम 91 दिनों के लिए, मजदूरी के 70 फीसदी की दर से नकद भुगतान किया जाता है. इस हित लाभ का भुगतान बीमारी प्रमाणीकरण से 7 दिन के भीतर हितलाभ मानक दर पर किया जाता है. बीमारी हितलाभ की पात्रता के लिए बीमाकृत कामगार से अपेक्षा की जाती है कि 6 महीनों की अंशदान अवधि में 78 दिनों के लिए अंशदान दें. इसके अलावा 34 घातक और दीर्घकालीन बीमारियों के मामले में मजदूरी के 80% की बढ़ी दर से कर्मचारी को हितलाभ 2 वर्षों तक विस्तारित किया जा सकता है.

अपंगता हितलाभ: अस्थायी अपंगता हितलाभ तब मिलता है, जब कर्मचारी रोजगार के दौरान चोट या व्यावसायिक चोट से ग्रसित हो जाता है और काम करने में असमर्थ होता है. यह हितलाभ औसत दैनिक मजदूरी के 90% की दर से तब तक अदा किया जाता है, जब तक अपंगता रहती है. इस हितलाभ की कोई सीमा निर्धारित नहीं है. अगर कोई कर्मचारी स्थायी रूप से अपंग हो जाता है तो उसे दैनिक मजदूरी के 90% की दर से मासिक आधार पर स्थायी अपंगता हितलाभ मिलता है. दसका भुगतान जीवनभर निरंतर मासिक पेंशन के रूप में होता है.


मातृत्व लाभ: मातृत्व छुट्टी के दौरान डिलीवरी के मामले में 12 सप्ताह तक, गर्भपात के मामले में 26 सप्ताह तक दैनिक वेतन का 100 फीसदी नकद भुगतान किया जाता है. इसके अलावा गर्भधारण, प्रसूति, समयपूर्व जन्म के कारण होने वाली बीमारी के मामले में एक माह से अधिक के लिए भुगतान किया जाता है. डिलीवरी के दौरान महिला की मृत्यु होने पर नॉमिनी को मैटरनिटी बेनिफिट मिलता है. ईएसआई के तहत मैटरनिटी बेनिफिट का लाभ लेने के लिए शर्त है कि बीमित महिला की ओर से पूर्ववर्ती वर्ष में 70 दिनों का अंशदान किया गया हो.

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