वापी के पेपर मीलों में अब गंध नियंत्रण पर अमल किया जायेगा.
वापी. भारतीय कागज उद्योग समावेशी व टिकाऊ विकास लाया है. गंध नियंत्रण टेकनिक टेक्नोलॉजी के कारण सफल जा रहा है. यह बात वापी में आयोजित एक वर्कशॉप में युनिडो के टेक्निकल डॉ. आर के जैन ने कही. उन्होंने कहा कि वापी के पेपर मीलों में अब गंध नियंत्रण को अमल में लाया जाएगा. वापी में भारतीय कागज उद्योग में गंध नियंत्रण टेक्नोलॉजी के सहयोग से वर्कशॉप का आयोजन किया गया था. सीपीपीआरआई व पेपर उद्योग संगठनों के साथ युएनआईडीओ द्वारा अमल में लाये जा रहे प्रोजेक्ट के भाग रूप डीपीआई आईटी, जीओआई द्वारा आयोजित वर्कशॉप में बड़ी संख्या में उद्योगपति उपस्थित थे.
भारत के कंट्री हेड रेने वैन बर्केल ने कहा कि वर्तमान परियोजना के तहत कार्यान्वित किया जा रहा है. उन्होंने आईएसआईडी को बढ़ावा देने और बढ़ाने के लिए सतत और समावेशी विकास के लिए UNIDO-DPPIT की प्रथाओं, तकनीकों और नीतियों और परियोजना के पहल के महत्व पर भी जोर दिया. वापी के उद्योगपति व शाह पेपरमील के चेयरमैन ए. के. शाह ने कहा कि चालू प्रोजेक्ट द्वारा युनिटों में टेक्निकल सपोर्ट से वापी पेपर क्लस्टर को बहुत फायदा हुआ है. वहीं उत्पादन बढ़ाने के उपरांत पानी व वेस्ट वाटर मैनेजमेंट के मुद्दे पर भी संबोधित किया. उन्होंने गंध नियंत्रण पहल की प्रशंसा की और पेपर मीलों को भी इसे अमल लाने के लिए अपील किया. जबकि एमडी गजानन व प्रमुख जीपीएमए तथा ललित गर्ग ने बोर्ड में उन्नत उत्पादकता के लिए प्रशंसा किया. वहीं फिनिश एक्सपर्ट्रर्स सीपीपीआरआई वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने एनपीए टेक्निकल बनाया था. जबकि श्रध्दा गुप्ता ने वर्कशॉप के दौरान प्रेजेंटेशन उत्पादकता, ऊर्जा कार्यक्षमता व क्षेत्रों में प्रवृत्तियों में संबंधित अद्यतन टेक्नोलॉजी के साथ वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट के संदर्भ में उल्लेख किया. इस प्रोजेक्ट से स्थानिकों को मजबूत बनाने में मदद किया है. विजय भट्ट द्वारा वर्कशॉप का संकलन किया गया था. वापी के मीलों में लाभ व प्रवृत्तियों की संभावितों पर पुनरावर्तित कागज क्लस्टर डायरेक्टर, सीपीपीआरआई डॉ एम के गुप्ता ने बताया कि युनिडो पेपर प्रोजेक्ट प्रवृत्तियों मात्र वापी पेपर क्लस्टर में ही नहीं परंतु समग्र देश में पेपर युनिटों को बहुत फायदा होगा.
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