मीरा-भायंदर. केंद्र में कांग्रेस आघाडी की सरकार सत्ता मे रहते हुए जवाहर लाल नेहरू नागरी पुनरुथान के अंतर्गत बीएसयूपी योजना शुरू की गई थी . इस योजना के लिए केंद्र सरकार की ओर से 50 फीसदी राज्य सरकार की तरफ से 40 फीसदी निधि दिया जाना था और 10 मीरा-भायंदर मनपा को देना था. योजना के अंतर्गत 4132 लाभार्थियों को घर दिया जाना था. पिछ्ले 5 वर्षों में मात्र 169 लोगों को घर दिया गया. 2014 मे केंद्र में भाजपा की सरकार आने के बाद यह योजना बंद कर दी गई. जिन लाभार्थियों को संक्रमण शिविर में स्थानांतरित किया गया था, उन्हें आज जबरदस्ती बाहर निकालने का प्रयास किया जा रहा है. यह बातें कांग्रेस के महाराष्ट्र प्रदेश कार्याध्यक्ष एवं मीरा-भायंदर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस-राकांपा आघाडी के उम्मीदवार मुजफ्फर हुसैन ने कही है. उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव सिर पर होने की वजह से इस योजना के लिए एमएमआरडीए से 125 करोड रुपये कर्ज लेने की बात की जा रही है, परंतु यह कर्ज कब मिलेगा, घर कब तैयार होगा और तब तक 4000 लाभार्थियों का क्या होगा, इनको कहां रखा जाएगा, इस बात की कोई भी जानकारी या सूचना लाभार्थियों को नहीं दी जा रही है. महानगर पालिका के अधिकारी संक्रमण शिविर में जाते हैं और उन्हें घर से बाहर निकाल देते हैं, इसकी मैं कडे शब्दों में निंदा करता हूं. मुजफ्फर हुसैन ने कहा कि विधायक बनने के बाद सर्वप्रथम बीएसयूपी योजना के लाभार्थियों को को न्याय दिलाने का प्रयास करूंगा. काशीमीरा के जनता नगर और काशी चर्च के दो झोपडपट्टियों में रहने वाले हजारों रहिवासियों का भविष्य भाजपा सरकार की लापरवाही की वजह से अंधकार में है. योजना को फिर से शुरू करने के लिए भाजपा सरकार ने किसी भी प्रकार का कार्य नही किया.

हुसैन ने कहा कि बीएसयूपी योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को घर मिलना चाहिए, इसकी पुरजोर मांग मैने विधान परिषद में की थी, लेेकिन भाजपा सरकार की तानाशाही नीतियों की वजह से योजना के लाभार्थियों पर शिविर से निर्वासित होने का समय आ गया है. उन्होंने कहा कि सत्ताधारी भाजपा द्वारा बीएसयूपी योजना से लाभार्थियों को जानबूझकर दूर किया जा रहा है. इन रहिवासियों को अपना घर कब पूरा करके मिलेगा, इसकी कोई भी गारंटी यह सरकार देने को तैयार नहीं है. एक तरफ घर तोड दिया गया और दूसरी ओर संक्रमण शिविर में इनकी दुर्दशा हो रही है. इन परिस्थितियों के लिए सत्ताधारी भाजपा सरकार ही जबाबदार है.

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