संगठन के बिखराव तथा कार्यकर्ताओं की किल्लत से जूझ रहे आघाडी के उम्मीदवार
———कुमार राजेश

मुंबई. महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में भाजपा का गढ मानी जाने वाली उत्तर मुंबई लोकसभा सीट के तहत आने वाली सभी छहो विधानसभा सीटों में से दो सीटों को छोड़ कांग्रेस-राकांपा आघाडी तथा मनसे दूर-दूर तक मुकाबले में नजर नहीं आ रही है. इसके उलट भाजपा-शिवसेना को मालाड विधानसभा सीट बोनस में मिलने की संभावना जताई जा रही है. विदित हो कि दहिसर विधानसभा सीट से भाजपा-शिवसेना-आरपीआई महायुति की उम्मीदवार तथा वर्तमान विधायक मनीषाताई चौधरी एक बार फिर से मैदान में हैं, जिनके मुकाबले कांग्रेस-राकांपा आघाडी ने अरूण सावंत को मैदान में उतारा है. यहां से शिवसेना विधायक रहे विनोद घोसालकर को महायुति ने उनके गृह क्षेत्र श्रीवर्धन-म्हसला से उम्मीदवारी देकर संतुष्ट कर दिया है. वहां से घोसालकर की जीत करीब-करीब तय मानी जा रही है, लिहाजा अन्य सीटों की भांति विरोध के बजाय स्थानीय शिवसैनिक महायुति की उम्मीदवार मनीषाताई चौधरी के प्रचार अभियान में पूरी एकजुटता से जुटे हुए हैं, जिससे उनकी स्थिति काफी मजबूत आंकी जा रही है. उन्हें बतौर विधायक किए गए विकास कार्यों के साथ ही भाजपा सांसद गोपाल शेट्टी तथा भाजपा-शिवसेना के नगरसेवकों द्वारा किए गए विकास कार्यों का लाभ मिलना तय है.

म्हाडा रिपेयर बोर्ड के चेयरमैन दर्जाप्राप्त राज्यमंत्री विनोद घोसालकर के सुपुत्र पूर्व नगरसेवक अभिषेक घोसालकर तथा उनकी नगरसेविका धर्मपत्नी तेजस्वी घोसालकर ने मनीषाताई चौधरी की जीत सुनिश्चित करने के लिए शिवसेना की ओर से पूरी कमान स्वत: संभाल रखी है. वहीं मुंबई कांग्रेस के प्रवक्ता रहे आघाडी के उम्मीदवार अरूण सावंत को संगठन के बिखराव तथा गुटबाजी से जूझना पड रहा है. आलम यह है कि वह अपनी जमानत बचाने में कामयाब हो जाएं तो यही उनकी सबसे बड़ी जीत मानी जाएगी. बडे नेताओं, जिलाध्यक्ष के चुनाव अभियान से दूरी बनाए रखने के कारण फिलहाल कांग्रेस-राकांपा आघाडी के कार्यकर्ता टूटे मनोबल के साथ महज प्रचार की औपचारिकता निभा रहे हैं. कमोबेश यही स्थिति मागाठाणे विधानसभा सीट की है, जहां से शिवसेना के विधायक प्रकाश सुर्वे इस बार शिवसेना-भाजपा-आरपीआई महायुति के उम्मीदवार के तौर पर मैदान में हैं, जिनके मुकाबले कांग्रेस-राकांपा आघाडी ने मणिशंकर चौहान को उम्मीदवारी देकर यह मुकाबला महायुति के पक्ष में एकतरफा बना दिया है. विधायक के तौर पर प्रकाश सुर्वे ने भरपूर विकास कार्य किए हैं. सभी जाति-धर्म के मतदाताओं में उनकी व्यापक पैठ है. भाजपा के विधान परिषद सदस्य प्रवीण दरेकर तथा पार्टी के मागाठाणे विधानसभा अध्यक्ष मोतीभाई देसाई समेत महायुति के सभी पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता पूरी ताकत से सुर्वे की जीत सुनिश्चित करने में जुटे हुए हैं. कांदीवली पूर्व से महायुति के उम्मीदवार तथा वर्तमान विधायक अतुल भातखलकर का मुकाबला आघाडी की उम्मीदवार मुंबई महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अजंता यादव से है. डा अजंता यादव तथा उनके पति राजपति यादव कई बार नगरसेवक रहे हैं, तथा क्षेत्र के विकास में अहम योगदान दिया है. उत्तर भारतीय तथा गुजराती मतदाताओं में इनकी खासी पैठ है, लिहाजा यहां रोचक मुकाबले की उम्मीद है. यहां महायुति के उम्मीदवार अतुल भातखलकर की स्थिति काफी मजबूत आंकी जा रही है. बोरीवली सीट भाजपा का गढ मानी जाती है. भाजपा ने इस बार अपने कद्दावर नेता विनोद तावडे का टिकट काटकर सुनील राणे को मौका दिया है, जहां उनका मुकाबला कांग्रेस-राकांपा आघाडी के कुमार खिलारे के बीच है. यहां भाजपा की जीत औपचारिकता मात्र है. कांदीवली पश्चिम से भाजपा के दिग्गज नेता योगेश सागर के मुकाबले आघाडी ने क्षेत्र के सक्रिय समाजसेवी कालू बुधेलिया को मैदान में उतारा है. यह योगेश सागर को कितनी चुनौती दे पाएंगे, यह भविष्य के गर्भ में है. मालाड विधानसभा सीट पर कांटे की टक्कर होने की संभावना जताई जा रही है. कांग्रेस-राकांपा आघाडी ने वर्तमान विधायक असलम शेख को एक बार फिर मौका दिया है. भाजपा ने यहां से कांदीवली पूर्व से विधायक रहे ठाकुर रमेश सिंह को मैदान में उतारा है. उत्तर भारतीय, मारवाडी, गुजराती-जैन, मुस्लिम मतदाताओं की बहुलता वाली इस सीट से पिछला चुनाव सभी राजनीतिक पार्टियां अलग-अलग लडी थीं. शिवसेना के डा विनय जैन ने करीब 17 हजार वोट हासिल किए, लिहाजा भाजपा के डा राम बारोट को पराजय का सामना करना पड़ा, और असलम शेख 2300 वोटों के मामूली अंतर से अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे थे. लोकसभा चुनाव में इस सीट से भाजपा को भारी बढत मिली है, लिहाजा भाजपा को इस सीट पर अपनी जीत की पूरी उम्मीद है.

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